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कबीरधाम के सरकारी स्कूलों में सुविधाओं के विस्तार की तैयारी, DEO ने 7 दिन में मांगी विकास कार्यों की जरूरत




कवर्धा, 30 अगस्त 2026। कबीरधाम जिले के शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में शिक्षा विभाग ने पहल तेज कर दी है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कबीरधाम द्वारा 27 अगस्त 2026 को जारी पत्र में जिले के सभी शासकीय विद्यालयों के प्राचार्यों एवं प्रधान पाठकों से विद्यालय में आवश्यक विकास कार्यों की मांग भेजने को कहा गया है।

जारी पत्र का विषय “वी.बी.जी. राम जी. के तहत कार्यों की मांग भेजने बाबत” है। पत्र में कहा गया है कि 24 अगस्त को आयोजित समय-सीमा बैठक में कलेक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार वीबी-जी रामजी योजना के प्रावधानों एवं अनुमेय कार्यों पर जिला स्तरीय विभागीय अधिकारियों के प्रशिक्षण के बाद विद्यालयों से संबंधित आवश्यक कार्यों की जानकारी जुटाई जा रही है। 

बालिका शौचालय से लेकर अतिरिक्त कक्ष तक होंगे प्रस्तावित कार्य


जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने विद्यालयों से उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार विभिन्न कार्यों के प्रस्ताव मांगे हैं। पत्र में विशेष रूप से बालिका शौचालय, किचन शेड, बाउंड्रीवाल, मैदान समतलीकरण तथा अतिरिक्त कक्ष जैसे कार्यों का उल्लेख किया गया है।

विद्यालयों को अपनी जरूरत के अनुसार निर्धारित प्रारूप में जानकारी देनी होगी। इसमें विद्यालय का नाम, विद्यालय का स्तर, कार्य का नाम, कार्य की संख्या तथा मजदूरी, सामग्री और कुल लागत का विवरण शामिल है।

इससे साफ है कि विभाग केवल सामान्य मांग नहीं, बल्कि कार्यवार और लागतवार ठोस प्रस्ताव तैयार करना चाहता है, ताकि जरूरत के आधार पर कार्यों को आगे स्वीकृति के लिए भेजा जा सके।

सिर्फ मांग नहीं, समय-सीमा में प्रस्ताव भेजने के निर्देश


पत्र में सभी विद्यालय प्रमुखों को अपनी आवश्यकता के अनुसार जानकारी निर्धारित प्रारूप में दो दिवस के भीतर उपलब्ध कराने तथा हार्ड कॉपी भवन शाखा में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

यह समय-सीमा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वीबी-जी रामजी योजना के तहत ग्राम स्तर पर स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों के चयन और अनुमोदन की प्रक्रिया चल रही है। योजना में ग्राम सभा की सहभागिता के साथ विभिन्न विकास कार्यों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है। 

पहले 129 स्कूलों में बालिका शौचालय को मिल चुकी है स्वीकृति


कबीरधाम में स्कूलों से जुड़ी सुविधाओं को वीबी-जी रामजी योजना से जोड़ने की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। अगस्त में जिले के 129 शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में बालिका शौचालय निर्माण के लिए 5 करोड़ 53 लाख 90 हजार रुपये की स्वीकृति की जानकारी सामने आई थी। इन कार्यों से एक ओर विद्यालयों में छात्राओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने और दूसरी ओर ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने का उद्देश्य रखा गया है। 

इससे यह संकेत मिलता है कि अब शिक्षा विभाग विद्यालयों की अन्य आवश्यकताओं को भी व्यवस्थित तरीके से चिन्हित कर योजना के तहत शामिल कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

वीबी-जी रामजी योजना में 318 तरह के कार्य अनुमेय


वीबी-जी रामजी योजना को केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखा गया है। इसके तहत 318 प्रकार के अनुमेय कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में रखा गया है—जल संरक्षण एवं संवर्धन, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका संवर्धन तथा जलवायु अनुकूलन एवं आपदा प्रबंधन। ग्रामीण अधोसंरचना के अंतर्गत स्कूल कक्ष, आंगनबाड़ी, पुस्तकालय सहित कई प्रकार के कार्य लिए जा सकते हैं। 

कबीरधाम में जुलाई में केंद्रीय टीम ने भी योजना के तहत चल रहे विभिन्न कार्यों का निरीक्षण किया था और कार्यों की गुणवत्ता, मजदूरी भुगतान, ऑनलाइन उपस्थिति तथा ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की समीक्षा की थी। 

शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुविधाओं को मिल सकता है नया आधार


विशेषज्ञ नजरिए से देखें तो इस आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि विद्यालयों से सीधे उनकी जरूरत पूछकर प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। इससे उन स्कूलों की वास्तविक समस्याएं सामने आ सकती हैं जहां विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्ष, स्वच्छता सुविधाएं, खेल मैदान या रसोई जैसी बुनियादी जरूरतें अभी भी अधूरी हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का यह कदम तभी प्रभावी परिणाम देगा, जब विद्यालयों से प्राप्त प्रस्तावों की स्थलवार जांच, प्राथमिकता निर्धारण, लागत की वास्तविकता और कार्यों की गुणवत्ता पर भी उतनी ही गंभीरता से निगरानी की जाए। इससे योजना का लाभ कागजी प्रस्तावों तक सीमित न रहकर वास्तव में विद्यालयों और विद्यार्थियों तक पहुंच सकेगा।

फिलहाल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के निर्देश के बाद जिले के शासकीय स्कूलों में आवश्यक विकास कार्यों की मांग तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि विद्यालयों से प्राप्त प्रस्तावों में कितने कार्य स्वीकृत होते हैं और उनका धरातल पर क्रियान्वयन कितनी तेजी से होता है।

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