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सड़क, पानी, शिक्षा और सरकारी भवनों की बदहाली का मुद्दा गरमाया, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने कलेक्टर के नाम सौंपा 12 सूत्रीय ज्ञापन



खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के अलग-अलग गांवों की समस्याएं उठाईं; अधूरी नल-जल योजनाओं, जर्जर सड़कों और स्कूल भवनों से लेकर छात्रावास निर्माण की गुणवत्ता पर जांच की मांग

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, 3 सितंबर 2026।
जिले के ग्रामीण इलाकों में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्कूल भवन, छात्रावास निर्माण और आवागमन से जुड़ी समस्याओं को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी छत्तीसगढ़ ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। पार्टी के प्रदेश महासचिव संतोष मरावी (युवा मोर्चा) की ओर से जिला कलेक्टर के नाम सौंपे गए ज्ञापन में जिले की अलग-अलग ग्राम पंचायतों और आश्रित ग्रामों से संबंधित 12 प्रमुख समस्याओं को सामने रखते हुए उनके निराकरण की मांग की गई है।

ज्ञापन में पार्टी ने कहीं वर्षों से अधूरी पड़ी नल-जल योजनाओं को पूरा कराने की मांग की है, तो कहीं जर्जर सड़कों की मरम्मत और डामरीकरण का मुद्दा उठाया है। इसके अलावा हाईस्कूल में शिक्षकों की कमी, जर्जर प्राथमिक शाला एवं आंगनबाड़ी भवनों के पुनर्निर्माण, बरसात में बाधित होने वाले ग्रामीण मार्ग पर पुल निर्माण तथा निर्माणाधीन पोस्ट मैट्रिक छात्रावास की गुणवत्ता की जांच की मांग भी की गई है।

पार्टी का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं से जुड़े इन मामलों का सीधा असर ग्रामीणों, विद्यार्थियों और विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है। ज्ञापन में प्रशासन से इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए मौके की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई है।



12 बिंदुओं में ग्रामीण समस्याओं का खाका

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के ज्ञापन को यदि व्यापक रूप से देखा जाए तो इसमें जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं की एक तस्वीर सामने आती है। सड़क से लेकर स्कूल और पेयजल से लेकर पुल तक, लगभग हर प्रमुख ग्रामीण आवश्यकता से संबंधित मुद्दा इसमें शामिल है।

1. लछना-लमती फीडर डेम का निर्माण निरस्त करने की मांग

ज्ञापन के पहले बिंदु में ग्राम पंचायत लछना-लमती फीडर डेम के निर्माण को निरस्त करने की मांग की गई है। पार्टी ने प्रशासन से इस परियोजना पर पुनर्विचार करने और निर्माण कार्य को निरस्त किए जाने की मांग रखी है।

यह मांग ज्ञापन का पहला मुद्दा है, इसलिए पार्टी ने इसे स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण विषय के रूप में प्रशासन के समक्ष रखा है। हालांकि इस बिंदु पर ज्ञापन में परियोजना के विरोध के विस्तृत तकनीकी कारण नहीं दिए गए हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर परियोजना की आवश्यकता, संभावित प्रभाव और तकनीकी पक्ष की जांच के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

2. भंडारपुर मेन रोड के दोनों किनारों पर नाली निर्माण की मांग

दूसरे बिंदु में ग्राम पंचायत भंडारपुर मेन रोड के दोनों किनारों पर नाली निर्माण की मांग की गई है।

ग्रामीण एवं मुख्य मार्गों पर उचित जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने पर बरसात के समय सड़क पर पानी जमा होना, सड़क की सतह खराब होना और आवागमन में परेशानी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। पार्टी ने इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सड़क के दोनों किनारों पर नाली निर्माण कराने की मांग रखी है।

यह मांग सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क और जल निकासी व्यवस्था को एक साथ विकसित करने की आवश्यकता की ओर संकेत करती है।

3. मुड़ीपार से ढारा तक प्रधानमंत्री सड़क की बदहाली, गड्ढों से दुर्घटनाओं का आरोप

ज्ञापन के तीसरे बिंदु में ग्राम पंचायत मुड़ीपार से ढारा तक प्रधानमंत्री सड़क की स्थिति को बेहद खराब बताया गया है।

पार्टी के अनुसार इस मार्ग पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं और सड़क की खराब स्थिति के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि सड़क की वर्तमान स्थिति को देखते हुए इसकी मरम्मत एवं डामरीकरण कराया जाना आवश्यक है।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रामीण सड़कें गांवों को बाजार, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य जरूरी सेवाओं से जोड़ने का काम करती हैं। सड़क की स्थिति खराब होने पर इसका असर केवल वाहन चालकों पर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों, किसानों, मरीजों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले ग्रामीणों पर भी पड़ता है।

पार्टी ने प्रशासन से इस मार्ग का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत और डामरीकरण कराने की मांग की है।

4. भंडारपुर में हाईस्कूल और सहकारी सोसायटी मार्ग पर बढ़ते मालवाहनों का दबाव

चौथे बिंदु में ग्राम पंचायत भंडारपुर में स्थित हाईस्कूल जाने वाली सड़क और सहकारी सोसायटी जाने वाली सड़क की समस्या उठाई गई है।

ज्ञापन के अनुसार दोनों स्थानों के लिए एक ही मार्ग का उपयोग होता है। इसी मार्ग से मालवाहनों की लगातार आवाजाही होती रहती है। पार्टी का कहना है कि भारी वाहनों की आवाजाही के कारण सड़क की स्थिति लगातार खराब हो रही है।

मामला सिर्फ सड़क खराब होने तक सीमित नहीं है। हाईस्कूल जाने वाला मार्ग विद्यार्थियों के आवागमन से जुड़ा हुआ है। ऐसे में भारी वाहनों की आवाजाही के बीच विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुगम आवागमन भी एक महत्वपूर्ण पहलू बन जाता है।

पार्टी ने संबंधित सड़क के पुनर्निर्माण की मांग की है।

5. खैरबना में पांच वर्षों से अधूरी नल-जल योजना का मुद्दा

ज्ञापन का पांचवां बिंदु ग्रामीण पेयजल व्यवस्था से जुड़ा है और इसमें ग्राम पंचायत बरबसपुर के अंतर्गत आने वाले आश्रित ग्राम खैरबना का उल्लेख है।

पार्टी के अनुसार खैरबना में नल-जल योजना पिछले पांच वर्षों से निर्माणाधीन है, लेकिन अभी तक योजना पूरी नहीं हो सकी है। ज्ञापन में दावा किया गया है कि योजना पूरी नहीं होने के कारण आम जनता को पिछले पांच वर्षों से पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

पार्टी का कहना है कि योजना का काम अधूरा रहने से ग्रामीण शासन की इस योजना के लाभ से वंचित हैं। इसलिए नल-जल योजना का निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण कराने की मांग की गई है।

यह मामला ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और उनकी समयसीमा पर भी सवाल खड़ा करता है। यदि किसी पेयजल योजना का काम लंबे समय तक अधूरा रहता है, तो उसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ता है जिनके लिए योजना बनाई गई है।

6. बरबसपुर से खैरबना तक जर्जर सड़क, जगह-जगह गड्ढों का हवाला

इसी क्षेत्र से संबंधित छठे बिंदु में पार्टी ने ग्राम बरबसपुर से आश्रित ग्राम खैरबना तक मुख्य मार्ग की स्थिति को जर्जर बताया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हैं और इसके कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। पार्टी ने इस मार्ग की मरम्मत कर डामरीकरण कराने की मांग की है।

गौर करने वाली बात यह है कि खैरबना को लेकर ज्ञापन में एक साथ दो महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं—एक तरफ पांच वर्षों से अधूरी नल-जल योजना, दूसरी तरफ गांव को जोड़ने वाली जर्जर मुख्य सड़क।

इससे साफ है कि पार्टी ने खैरबना में पेयजल और संपर्क मार्ग दोनों को प्राथमिकता के साथ प्रशासन के सामने रखा है।

7. सांकरी की अधूरी नल-जल योजना जल्द पूरी कराने की मांग

सातवें बिंदु में ग्राम पंचायत गातापार जंगल के आश्रित ग्राम सांकरी की पेयजल समस्या का उल्लेख किया गया है।

ज्ञापन के मुताबिक सांकरी में नल-जल योजना का कार्य अभी तक अपूर्ण है। पार्टी ने कहा है कि योजना का संचालन शुरू करने के लिए निर्माण कार्य जल्द पूरा किया जाना चाहिए।

ग्रामीण इलाकों में नल-जल योजना का उद्देश्य घरों तक नियमित पेयजल पहुंचाना है। ऐसे में निर्माण पूरा नहीं होने तक ग्रामीणों को योजना का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाता।

पार्टी ने प्रशासन से इस योजना की वर्तमान स्थिति की जांच कर शेष निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कराने की मांग की है।

8. गातापार जंगल हाईस्कूल में शिक्षकों की कमी, विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात

ज्ञापन का आठवां बिंदु शिक्षा व्यवस्था से संबंधित है।

ग्राम पंचायत गातापार जंगल में स्थित हाईस्कूल में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए पार्टी ने कहा है कि सभी विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण छात्राओं की शिक्षा प्रभावित हो रही है।

ज्ञापन में आशंका व्यक्त की गई है कि शिक्षकों की कमी का असर विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम पर भी पड़ सकता है।

पार्टी ने मांग की है कि हाईस्कूल में सभी आवश्यक विषयों के शिक्षकों की व्यवस्था की जाए ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई नियमित रूप से हो सके।

यह मांग ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की उस चुनौती को सामने लाती है जिसमें स्कूल का भवन और विद्यार्थी तो मौजूद होते हैं, लेकिन सभी विषयों के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं होने पर शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होने लगती है।

9. ठाकुरटोला में आदिवासी पोस्ट मैट्रिक छात्रावास के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल

ज्ञापन का सबसे गंभीर और जांच की मांग वाला बिंदु ग्राम पंचायत ठाकुरटोला में निर्माणाधीन पोस्ट मैट्रिक छात्रावास (अनुसूचित जनजाति) से संबंधित है।

पार्टी ने छात्रावास निर्माण में गुणवत्ता में कमी किए जाने का आरोप लगाया है। ज्ञापन में कहा गया है कि सड़क से लगी हुई सिंचाई विभाग की नाली के पास/साथ छात्रावास का निर्माण किया जा रहा है।

पार्टी ने आशंका जताई है कि नाली से लगे होने के कारण भविष्य में छात्रावास में सीपेज की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

इसके साथ ही ज्ञापन में एक और तकनीकी आपत्ति दर्ज की गई है। पार्टी के अनुसार छात्रावास का निर्माण संबंधित सड़क से लगभग चार फीट नीचे किया जा रहा है। पार्टी ने इन परिस्थितियों को देखते हुए निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी उपयुक्तता पर संदेह जताया है।

इसी आधार पर पार्टी ने संबंधित निर्माण कार्य की उचित जांच कराने तथा निर्माण कार्य को सही तरीके से कराने की मांग की है।

यह मामला प्रशासन के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि छात्रावास विद्यार्थियों के रहने से संबंधित भवन है और निर्माण के दौरान जल निकासी, सड़क का लेवल, भवन की नींव और गुणवत्ता जैसे तकनीकी पहलुओं की जांच आवश्यक होती है।

हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये आरोप ज्ञापन में पार्टी द्वारा लगाए गए हैं; उनकी स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि इस दस्तावेज से नहीं होती। इसलिए आगे की वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

10. सिवनी में जर्जर प्राथमिक शाला भवन, नए भवन की मांग

दसवें बिंदु में ग्राम पंचायत चुरैदा के अंतर्गत आश्रित ग्राम सिवनी की प्राथमिक शाला भवन की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि प्राथमिक शाला का भवन जर्जर स्थिति में है और इसकी वजह से कभी भी दुर्घटना घटित होने की आशंका बनी हुई है।

पार्टी ने पुराने और जर्जर भवन की जगह नए प्राथमिक शाला भवन के निर्माण की मांग की है।

स्कूल भवन का जर्जर होना केवल आधारभूत संरचना की समस्या नहीं है, बल्कि यह सीधे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ऐसे भवन में पढ़ने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए भवन की तकनीकी जांच और आवश्यक कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है।

11. मड़वामाठा में आंगनबाड़ी और प्राथमिक शाला भवन भी जर्जर

ग्यारहवें बिंदु में ग्राम पंचायत देवरचचा के अंतर्गत आश्रित ग्राम मड़वामाठा की समस्या सामने रखी गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि यहां आंगनबाड़ी एवं प्राथमिक शाला भवन की स्थिति जर्जर है। पत्र में भवन की छत से संबंधित खराब स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इससे कभी भी दुर्घटना हो सकती है।

पार्टी ने यहां भी आंगनबाड़ी और प्राथमिक शाला भवन के नवनिर्माण की मांग की है।

एक ही ज्ञापन में दो अलग-अलग गांवों के जर्जर स्कूल भवनों का मुद्दा उठाया जाना इस बात को रेखांकित करता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के लिए सुरक्षित और पर्याप्त भवन उपलब्ध कराना भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

12. छिंदारी के भेलवाघाट नाले पर पुल की मांग

ज्ञापन का अंतिम और 12वां बिंदु ग्राम पंचायत चोरलाडीह के अंतर्गत आश्रित ग्राम छिंदारी से संबंधित है।

पार्टी के अनुसार छिंदारी का मुख्य नाला भेलवाघाट है और इसी रास्ते से विद्यार्थी एवं ग्रामीण नियमित रूप से आवागमन करते हैं। लेकिन बरसात के मौसम में नाले में बाढ़ आने के कारण आवागमन बाधित हो जाता है।

इससे विद्यार्थियों की आवाजाही प्रभावित होती है और ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

पार्टी ने इस समस्या का स्थायी समाधान बताते हुए संबंधित स्थान पर आवागमन के लिए पुल निर्माण कराने की मांग की है।

यदि बरसात के दौरान किसी मार्ग पर पानी का बहाव इतना बढ़ जाता है कि लोगों का आवागमन रुक जाए, तो पुल अथवा उपयुक्त क्रॉसिंग जैसी स्थायी संरचना ग्रामीण संपर्क के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।

एक नजर में देखें तो क्या कहता है पूरा ज्ञापन?

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के इस 12 सूत्रीय ज्ञापन को केवल मांगों की सूची के रूप में देखने के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी जरूरतों के दस्तावेज के रूप में देखा जाए तो इसमें चार बड़े क्षेत्र प्रमुखता से सामने आते हैं।

पहला—सड़क और आवागमन

मुड़ीपार-ढारा, बरबसपुर-खैरबना और भंडारपुर की सड़कों की मरम्मत, डामरीकरण एवं पुनर्निर्माण की मांग की गई है। वहीं छिंदारी में बरसात के दौरान आवागमन की समस्या को देखते हुए पुल निर्माण की मांग है।

दूसरा—पेयजल

खैरबना और सांकरी की नल-जल योजनाओं को शीघ्र पूरा करने की मांग की गई है। खासकर खैरबना की योजना को लेकर पांच वर्षों से अधूरा होने का दावा किया गया है।

तीसरा—शिक्षा और विद्यार्थियों की सुरक्षा

गातापार जंगल हाईस्कूल में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया गया है। इसके अलावा सिवनी तथा मड़वामाठा में जर्जर शैक्षणिक भवनों के पुनर्निर्माण की मांग की गई है।

चौथा—सरकारी निर्माण की गुणवत्ता

ठाकुरटोला में निर्माणाधीन अनुसूचित जनजाति पोस्ट मैट्रिक छात्रावास की गुणवत्ता, जल निकासी और सड़क के स्तर को लेकर जांच की मांग की गई है।

ज्ञापन में उठे सवाल अब प्रशासन की जांच पर टिके

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने अपने ज्ञापन के माध्यम से जिन 12 समस्याओं को उठाया है, उनमें कई ऐसे मुद्दे हैं जिनका समाधान केवल कागजी कार्रवाई से नहीं बल्कि मौके पर निरीक्षण और विभागीय जांच से संभव होगा।

मसलन, सड़क की वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित विभाग को स्थल निरीक्षण करना होगा। नल-जल योजनाओं के मामले में यह देखना होगा कि निर्माण किस स्तर तक पहुंचा है, कार्य में देरी क्यों हुई और योजना को पूरा करने के लिए क्या शेष है। स्कूल भवनों के मामले में भवन की तकनीकी स्थिति का परीक्षण आवश्यक होगा।

इसी तरह ठाकुरटोला के छात्रावास को लेकर लगाए गए गुणवत्ता संबंधी आरोपों की पुष्टि या खंडन भी तकनीकी जांच के बाद ही किया जा सकता है।

इसलिए अब महत्वपूर्ण यह होगा कि जिला प्रशासन इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है, संबंधित विभागों को जांच के लिए भेजा जाता है या नहीं और शिकायतों के निराकरण के लिए कोई समयसीमा तय होती है या नहीं।

ग्रामीण समस्याओं से जुड़े ज्ञापन ने प्रशासन के सामने रखी बड़ी चुनौती

ज्ञापन की खास बात यह है कि इसमें किसी एक गांव की समस्या नहीं बल्कि जिले के अलग-अलग ग्राम पंचायत क्षेत्रों की समस्याओं को एक साथ उठाया गया है। इसमें लछना-लमती, भंडारपुर, मुड़ीपार, ढारा, बरबसपुर, खैरबना, गातापार जंगल, सांकरी, ठाकुरटोला, चुरैदा-सिवनी, देवरचचा-मड़वामाठा और चोरलाडीह-छिंदारी जैसे क्षेत्रों का उल्लेख है।

इस लिहाज से यह ज्ञापन ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं को लेकर उठाए गए कई सवालों को एक मंच पर लाता है।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इन मांगों पर किस स्तर पर कार्रवाई करता है। यदि संबंधित विभागों द्वारा स्थल निरीक्षण कर समस्याओं की वास्तविक स्थिति सामने लाई जाती है और पात्र मामलों में निर्माण, मरम्मत अथवा नियुक्ति की कार्रवाई होती है, तो इससे संबंधित ग्रामीणों को राहत मिल सकती है।

फिलहाल गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने प्रशासन से इन 12 समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निराकरण की मांग की है।

पत्र में दर्ज मुख्य मांगें एक नजर में

डेम निर्माण निरस्त करें → नाली बनाएं → जर्जर सड़कों की मरम्मत करें → सड़कों का डामरीकरण/पुनर्निर्माण करें → अधूरी नल-जल योजनाएं पूरी करें → हाईस्कूल में शिक्षक उपलब्ध कराएं → छात्रावास निर्माण की गुणवत्ता की जांच करें → जर्जर स्कूल एवं आंगनबाड़ी भवनों का पुनर्निर्माण करें → बरसात में बाधित मार्ग पर पुल बनाएं।

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