सियासत से दूर, जन-कल्याण का महापथ: 151 किमी के दुर्गम रास्तों को नाप रही पंडरिया की 'मातृशक्ति'
अमरकंटक से भोरमदेव तक कांवड़ यात्रा का विहंगम दृश्य; विधायक भावना बोहरा के साथ कदमताल कर रहीं जिला पंचायत सदस्य राजेश्वरी धृतलहरे
कुण्डा (विशेष संवाददाता):
आमतौर पर जनप्रतिनिधियों की पहचान वातानुकूलित गाड़ियों और बड़े राजनीतिक मंचों से होती है, लेकिन कबीरधाम जिले के पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों एक अलग ही तस्वीर आकार ले रही है। क्षेत्र की सुख-समृद्धि, किसानों के खेतों में अच्छी बारिश और आम जनमानस के कल्याण के लिए एक ऐसा संकल्प लिया गया है, जो आस्था और अदम्य साहस की नई कहानी लिख रहा है। पंडरिया की विधायक भावना बोहरा के नेतृत्व में 10 अगस्त से एक विशाल कांवड़ यात्रा निकाली जा रही है, जो अमरकंटक में मां नर्मदा के उद्गम स्थल से शुरू होकर 'छत्तीसगढ़ के खजुराहो' यानी भोरमदेव मंदिर तक का 151 किलोमीटर का अत्यंत कठिन सफर तय कर रही है।
इस ऐतिहासिक यात्रा की सबसे खास बात यह है कि इस दुर्गम पथ पर विधायक अकेली नहीं हैं। जनसेवा के इस महायज्ञ में क्षेत्र क्रमांक 04 की जिला पंचायत सदस्य श्रीमती राजेश्वरी महेंद्र धृतलहरे एक सच्चे 'हमसफर' की तरह पहले दिन से उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं।
मैकल के पहाड़ और उफनते नदी-नाले भी नहीं डिगा पाए हौसला
151 किलोमीटर की पदयात्रा, वह भी सावन-भादो के महीने में, कोई आसान काम नहीं है। इस जत्थे ने मैकल पर्वत श्रृंखला के बीहड़ जंगलों, ऊंची-नीची घाटियों और बारिश के कारण पूरे उफान पर बह रहे पहाड़ी नदी-नालों को पार किया है। लेकिन इसे आस्था का ज्वार ही कहेंगे कि न तो महिलाओं के कदम रुके और न ही उनके चेहरों पर थकान नजर आई। जहां से भी यह कांवड़ यात्रा गुजरी, ग्रामीणों ने पलक पावड़े बिछा दिए। रास्तों में ग्रामीणों द्वारा पुष्पवर्षा कर इस 'मातृशक्ति' और शिवभक्तों के जत्थे का आत्मीय स्वागत किया जा रहा है।
डोंगरिया से बोड़ला की ओर बढ़ा कारवां, गूंजे 'हर-हर महादेव' के जयकारे
यात्रा के पांचवें दिन (गुरुवार) का नजारा अद्भुत था। ग्राम डोंगरिया में सुबह विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद 'बम-बम भोले' के जयकारों के साथ यह विशाल कारवां भोरमदेव की दिशा में आगे बढ़ चला। यात्रा का पड़ाव आज रात बोड़ला में रहेगा, जहां समूचा गांव शिवभक्तों की सेवा के लिए तत्पर है।
16 अगस्त को होगा महा-जलाभिषेक
यह महायात्रा अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच रही है। 16 अगस्त की सुबह बोड़ला से यह जत्था भोरमदेव मंदिर के लिए प्रस्थान करेगा। वहां पहुंचकर मां नर्मदा के पवित्र जल से बाबा भोरमदेव का जलाभिषेक किया जाएगा और इसी के साथ इस 151 किलोमीटर लंबे संकल्प की पूर्णाहुति होगी।
चुनौतियां आस्था के आगे बौनी साबित हुईं: राजेश्वरी धृतलहरे
इस कठिन सफर के बीच 'दैनिक संवाददाता' से बात करते हुए जिला पंचायत सदस्य राजेश्वरी धृतलहरे ने कहा,
"जब उद्देश्य पवित्र हो, तो रास्ते की बाधाएं खुद-ब-खुद दूर हो जाती हैं। यह कांवड़ यात्रा हमारे पंडरिया क्षेत्र के एक-एक नागरिक की सुख-समृद्धि के लिए है। विधायक भावना बोहरा जी ने जो संकल्प लिया, उसमें हम सभी ने यह प्रार्थना की है कि हमारे किसानों के चेहरे पर मुस्कान रहे। रास्ते में पहाड़ और उफनती नदियां जरूर मिलीं, लेकिन शिव के प्रति आस्था और जनता के प्रति समर्पण के आगे ये सारी चुनौतियां बहुत छोटी पड़ गईं।"
राजेश्वरी जी ने यह भी जोड़ा कि विधायक महोदया की लगन क्षेत्र के हर कार्यकर्ता और आम नागरिक के लिए ऊर्जा का स्रोत बन गई है।
सियासी मायने और सामाजिक संदेश
राजनीतिक पंडितों की मानें तो इस कांवड़ यात्रा ने क्षेत्र में एक बड़ा सामाजिक संदेश दिया है। नेताओं का जनता के साथ इस तरह ज़मीनी स्तर पर, पैदल चलकर जुड़ना और उनके कल्याण के लिए शारीरिक कष्ट उठाना, एक ऐसा जनसंपर्क है जो भाषणों और रैलियों से कहीं आगे का असर छोड़ता है। 16 अगस्त को भोरमदेव में उमड़ने वाला जनसैलाब इस बात की गवाही देगा कि यह यात्रा पंडरिया के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो चुकी है।


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