CG School Order 2026: सरकारी स्कूलों में Saraswati Vandana, Gayatri Mantra समेत नई Daily Routine लागू, आदेश पर शुरू हुई बहस
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों के लिए 12 जून 2026 को जारी एक आधिकारिक आदेश अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है। School Education Department, Chhattisgarh Government की ओर से जारी इस आदेश में राज्य के सभी District Education Officers (DEO) को निर्देश दिए गए हैं कि Academic Session 2026-27 से विभाग के अधीन संचालित सभी सरकारी स्कूलों में प्रतिदिन एक तय क्रम के अनुसार गतिविधियां कराई जाएं।
आदेश महानदी भवन, मंत्रालय, नया रायपुर अटल नगर से जारी किया गया है। इसका पत्र क्रमांक GENCOR-35010/1981/2026-SCHOOL EDUCATION SECTION है और इस पर अवर सचिव रमेश्वर प्रसाद वर्मा के डिजिटल हस्ताक्षर दर्ज हैं। आदेश का विषय है— "शालाओं में विभिन्न गतिविधियां संचालित किए जाने के संबंध में।"
इस सरकारी निर्देश के अनुसार अब सुबह की प्रार्थना सभा केवल Rashtragaan या Rashtrageet तक सीमित नहीं रहेगी। आदेश में Deep Prajwalan, Saraswati Vandana, Guru Mantra और महापुरुषों की जीवनी का वाचन भी शामिल किया गया है। वहीं Mid-Day Meal से पहले Bhojan Mantra तथा स्कूल की छुट्टी के समय Gayatri Mantra और Shanti Mantra का सामूहिक पाठ कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि आदेश में इन गतिविधियों को केवल सुझाव के रूप में नहीं बल्कि प्रतिदिन निर्धारित क्रम (Daily Schedule) में आयोजित करना सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। यही बिंदु इस आदेश को सामान्य प्रशासनिक निर्देश से अलग बनाता है और इसी वजह से इसके सामाजिक, शैक्षणिक और संवैधानिक पहलुओं पर चर्चा तेज हो गई है।
अब बहस का केंद्र केवल यह नहीं है कि स्कूलों में कौन-कौन सी गतिविधियां कराई जाएंगी, बल्कि यह भी है कि क्या राज्य सरकार द्वारा संचालित Government Schools में किसी विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों को दैनिक कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जा सकता है? इसी प्रश्न ने इस आदेश को राज्य की सबसे चर्चित Education News में बदल दिया है।
क्या Government School में धार्मिक मंत्रों का पाठ कराया जा सकता है? यहीं से शुरू होती है असली बहस
सरकारी आदेश सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या किसी Government School की Daily Assembly में ऐसे मंत्र शामिल किए जा सकते हैं, जिनकी पहचान किसी विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़ी मानी जाती है?
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूल केवल एक समुदाय या धर्म के विद्यार्थियों के लिए नहीं हैं। यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन, आदिवासी समुदाय सहित विभिन्न धार्मिक और सामाजिक पृष्ठभूमि के छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। ऐसे में यदि किसी एक धार्मिक परंपरा के मंत्रों को दैनिक कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जाता है तो स्वाभाविक रूप से इस पर सार्वजनिक बहस होना तय है।
संविधान का Secular Principle क्या कहता है?
भारत का संविधान देश को Sovereign Socialist Secular Democratic Republic घोषित करता है। यहां Secularism का अर्थ केवल सभी धर्मों का सम्मान करना नहीं है, बल्कि यह भी है कि State किसी एक धर्म का पक्षधर नहीं बने।
इसी वजह से सरकारी संस्थानों, खासकर Government Schools, में धार्मिक गतिविधियों को लेकर संविधान में अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं।
Article 25: सभी नागरिकों को Religious Freedom
Article 25 प्रत्येक नागरिक को अपनी इच्छा से किसी भी धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है।
इसका सीधा अर्थ यह है कि कोई भी छात्र या अभिभावक अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जीवन जी सकता है। लेकिन यही अनुच्छेद राज्य को यह अधिकार नहीं देता कि वह किसी विशेष धार्मिक परंपरा को सरकारी संस्थानों में अनिवार्य रूप से अपनाए।
Article 28 क्यों बना बहस का केंद्र?
इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा Article 28 of the Constitution की हो रही है।
इस अनुच्छेद में सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में Religious Instruction को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।
Article 28(1) कहता है कि—
राज्य के पूर्ण वित्तपोषण (Wholly Maintained) वाले शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी।
वहीं Article 28(3) के अनुसार किसी भी छात्र को उसकी या उसके अभिभावक की सहमति के बिना किसी Religious Instruction या Religious Worship में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
यही वजह है कि कई Constitutional Experts और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि किसी सरकारी स्कूल की Daily Assembly में Saraswati Vandana, Guru Mantra, Gayatri Mantra और Bhojan Mantra को नियमित रूप से शामिल किया जाता है, तो क्या यह Article 28 की भावना के अनुरूप माना जाएगा?
क्या Supreme Court ने पहले भी ऐसे मामलों पर टिप्पणी की है?
भारत में स्कूल प्रार्थना और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े कई मामलों पर Supreme Court सुनवाई कर चुका है।
सबसे चर्चित मामला Bijoe Emmanuel vs State of Kerala (1986) का है। इस केस में तीन छात्रों ने अपनी धार्मिक मान्यता के कारण National Anthem नहीं गाया, लेकिन वे सम्मानपूर्वक खड़े रहे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Article 25 के तहत उनकी धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए और केवल अलग धार्मिक विश्वास रखने के कारण उन्हें दंडित नहीं किया जा सकता।
यह फैसला आज भी अक्सर उन मामलों में उद्धृत किया जाता है, जहां स्कूलों में धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों का प्रश्न उठता है।
सरकार का उद्देश्य क्या हो सकता है?
आदेश में कहीं भी यह नहीं लिखा गया है कि इन गतिविधियों का उद्देश्य किसी धर्म का प्रचार करना है। सरकार या आदेश के समर्थक यह तर्क दे सकते हैं कि इन गतिविधियों का मकसद Indian Culture, Value Education, Discipline और Moral Development को बढ़ावा देना है।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि जब किसी गतिविधि का सीधा संबंध किसी विशेष धार्मिक परंपरा से हो, तब सरकारी स्कूलों में उसे शामिल करने पर संवैधानिक बहस होना स्वाभाविक है।
अगर इस आदेश को Court में चुनौती दी गई तो किन सवालों पर होगी सुनवाई?
फिलहाल Chhattisgarh School Education Department का यह आदेश लागू करने के लिए जारी किया गया है। लेकिन यदि भविष्य में इस पर Public Interest Litigation (PIL) या किसी अन्य कानूनी याचिका के माध्यम से अदालत का दरवाजा खटखटाया जाता है, तो बहस कुछ अहम संवैधानिक प्रश्नों के इर्द-गिर्द घूम सकती है।
संभावित प्रश्न हो सकते हैं—
- क्या Government Schools में किसी विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों को दैनिक गतिविधि का हिस्सा बनाया जा सकता है?
- क्या Saraswati Vandana, Guru Mantra, Gayatri Mantra और Bhojan Mantra को सांस्कृतिक गतिविधि माना जाएगा या धार्मिक अभ्यास?
- यदि कोई विद्यार्थी या उसके अभिभावक इसमें शामिल नहीं होना चाहते, तो क्या उन्हें इससे अलग रहने का अधिकार होगा?
- क्या यह आदेश Article 25 और Article 28 की संवैधानिक भावना के अनुरूप है?
इन सभी सवालों का अंतिम जवाब केवल अदालत ही दे सकती है। अभी तक इस आदेश को लेकर किसी न्यायालय का फैसला सामने नहीं आया है।
इस आदेश को लेकर दो अलग-अलग नजरिए
सरकार और समर्थकों की संभावित दलील
इस आदेश के समर्थकों का कहना है कि इसमें शामिल कई गतिविधियां भारतीय संस्कृति, अनुशासन और नैतिक शिक्षा से जुड़ी हैं। उनके अनुसार—
- Rashtragaan और Rashtrageet राष्ट्रीय एकता के प्रतीक हैं।
- महापुरुषों की जीवनी छात्रों को प्रेरणा देती है।
- Deep Prajwalan और Saraswati Vandana को भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
- Value Education और Moral Development के उद्देश्य से ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
समर्थकों का तर्क है कि इसका उद्देश्य किसी धर्म का प्रचार नहीं बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना है।
आलोचकों की आपत्ति
दूसरी ओर, शिक्षा विशेषज्ञों, संवैधानिक मामलों के जानकारों और कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थी एक ही धार्मिक पृष्ठभूमि से नहीं आते।
उनका तर्क है कि—
- Government Schools राज्य द्वारा संचालित संस्थान हैं।
- यहां किसी एक धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों को नियमित कार्यक्रम का हिस्सा बनाना विवाद का कारण बन सकता है।
- यदि सरकार नैतिक शिक्षा देना चाहती है तो Constitution Preamble, Fundamental Duties, Scientific Temper, Human Values और National Integration जैसे सार्वभौमिक विषयों पर भी आधारित कार्यक्रम तैयार किए जा सकते हैं।
आदेश के बाद सबसे बड़ा सवाल अब यही है...
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही बन गया है कि क्या सरकारी स्कूलों की Assembly में धार्मिक पहचान रखने वाले मंत्रों को शामिल करना संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के अनुरूप माना जाएगा, या इसे अदालत में चुनौती मिलने पर इसकी अलग कानूनी व्याख्या सामने आएगी?
जब तक इस विषय पर सरकार की विस्तृत सफाई या किसी न्यायालय का निर्णय नहीं आता, तब तक यह मुद्दा शिक्षा, संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन की बहस का हिस्सा बना रहेगा।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ सरकार का 12 जून 2026 का यह आदेश केवल स्कूलों की Morning Assembly का नया कार्यक्रम तय करने तक सीमित नहीं है। इसने शिक्षा व्यवस्था, संवैधानिक मूल्यों और धर्मनिरपेक्षता को लेकर एक व्यापक सार्वजनिक चर्चा शुरू कर दी है।
एक ओर सरकार इसे स्कूलों में दैनिक गतिविधियों का हिस्सा बनाना चाहती है, तो दूसरी ओर कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या सरकारी संस्थानों में ऐसे निर्देश संविधान की मूल भावना के अनुरूप हैं। इन दोनों पक्षों के बीच संतुलन स्थापित करना और यदि आवश्यकता हो तो इसकी संवैधानिक व्याख्या करना अंततः न्यायपालिका का विषय होगा।
FAQ
Q1. छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूलों के लिए कौन-सा नया आदेश जारी किया है?
सरकार ने 12 जून 2026 को आदेश जारी कर Academic Session 2026-27 से सरकारी स्कूलों में Morning Assembly, Mid-Day Meal और छुट्टी के समय कुछ निर्धारित गतिविधियां कराने के निर्देश दिए हैं।
Q2. आदेश में कौन-कौन सी गतिविधियां शामिल हैं?
आदेश में Rashtragaan, Rashtrageet, Deep Prajwalan, Saraswati Vandana, Guru Mantra, Mahapurushon ki Jeevani, Bhojan Mantra, Gayatri Mantra और Shanti Mantra शामिल हैं।
Q3. विवाद किस बात को लेकर है?
बहस इस बात पर है कि क्या सरकारी स्कूलों में किसी विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों को दैनिक कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना भारत के Secular Constitution और Article 28 की भावना के अनुरूप है।
Q4. क्या इस आदेश को अदालत में चुनौती दी गई है?
इस समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि इस आदेश पर अदालत का कोई अंतिम फैसला आ चुका है। यदि भविष्य में याचिका दायर होती है, तो उसकी संवैधानिक वैधता पर न्यायपालिका निर्णय करेगी।

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