कबीरधाम के शासकीय स्कूलों में कथित RSS अभ्यास वर्ग को लेकर विवाद, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
कबीरधाम (छत्तीसगढ़) | विशेष रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के शासकीय स्कूलों में कथित रूप से RSS के अभ्यास वर्ग लगाए जाने का दावा सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के माध्यम से किया जा रहा है। वायरल वीडियो में कुछ लोग जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से मुलाकात कर इस पूरे मामले पर जवाब मांगते और ज्ञापन सौंपते दिखाई दे रहे हैं।
यदि सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे सही हैं, तो यह मामला केवल एक कार्यक्रम का नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और संविधान के सिद्धांतों से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन जाता है।
भारत का संविधान देश को एक धर्मनिरपेक्ष (Secular) राष्ट्र घोषित करता है। संविधान का अनुच्छेद 28(1) स्पष्ट करता है कि राज्य द्वारा पूर्ण रूप से संचालित शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी। सरकारी विद्यालयों का उद्देश्य सभी धर्मों, जातियों और समुदायों के बच्चों को समान एवं निष्पक्ष शिक्षा देना है। इसलिए किसी भी धर्म, पंथ या संगठन विशेष से जुड़े प्रशिक्षण या वैचारिक गतिविधियों को लेकर स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं।
इस मामले में कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आते हैं—
- क्या शासकीय स्कूलों में ऐसा कोई कार्यक्रम वास्तव में आयोजित हुआ?
- यदि हुआ, तो क्या इसके लिए शिक्षा विभाग से विधिवत अनुमति ली गई थी?
- यदि अनुमति दी गई थी, तो उसका आदेश सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
- जिला शिक्षा अधिकारी को इसकी जानकारी थी या नहीं?
- यदि जानकारी नहीं थी, तो जिम्मेदारी किसकी बनती है?
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।
नोट: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और उसमें किए गए दावों के आधार पर तैयार की गई है। इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।

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