Ken-Betwa River Linking Project के विरोध में आदिवासियों का प्रदर्शन, बोले- 'न्याय दो या मार दो'
छतरपुर/पन्ना। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में निर्माणाधीन Ken-Betwa River Linking Project को लेकर प्रभावित आदिवासी समुदायों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। हाल ही में स्थानीय ग्रामीणों ने सांकेतिक चिता सजाकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और "न्याय दो, या मार दो" का नारा लगाते हुए अपने अधिकारों की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय, उचित Rehabilitation और Resettlement नहीं मिलेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
Ken-Betwa River Linking Project देश की पहली River Interlinking Project है, जिसका उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और जल संरक्षण की व्यवस्था को मजबूत करना है। इस परियोजना का केंद्र प्रस्तावित Dodhan Dam है, जिसका निर्माण मध्य प्रदेश में किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस परियोजना से लाखों लोगों को सिंचाई और पेयजल का लाभ मिलेगा तथा बुंदेलखंड में लंबे समय से चली आ रही जल संकट की समस्या कम होगी।
हालांकि, परियोजना को लेकर पर्यावरण और सामाजिक स्तर पर गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं। प्रस्तावित Dodhan Dam का हिस्सा Panna Tiger Reserve के भीतर आता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इससे वन क्षेत्र, जैव विविधता और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर असर पड़ सकता है। वहीं परियोजना के कारण छतरपुर और पन्ना जिलों के कई गांव प्रभावित हो रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार निवास करते हैं।
पर्यावरण विषयों पर रिपोर्टिंग करने वाली पत्रिका Down To Earth की रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना से प्रभावित कई परिवारों ने आरोप लगाया है कि Rehabilitation Process के दौरान उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ स्थानों पर मानसून के दौरान मकानों को तोड़ा गया और लोगों को जल्दबाजी में विस्थापित किया गया। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उनके पुश्तैनी घरों, खेती की जमीन और जंगलों से विस्थापित किया जा रहा है। उनका आरोप है कि Compensation और Resettlement Package में कई विसंगतियां हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि सभी प्रभावित परिवारों को समान और पारदर्शी मुआवजा दिया जाए, महिलाओं को भी बराबरी का अधिकार मिले तथा उन मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिनमें कथित रूप से गैर-प्रभावित लोगों को भी मुआवजा दिए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी पुरुष, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हुए। लोगों ने सांकेतिक चिता के माध्यम से अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो उनके सामने जीवन और आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। प्रदर्शन स्थल पर "Nyay Do, Ya Maar Do", "Jal, Jungle, Zameen Hamara Adhikar" जैसे नारे भी लगाए गए।
ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि विकास की प्रक्रिया में प्रभावित लोगों के अधिकारों का सम्मान किया जाए। उनका कहना है कि बिना उचित Rehabilitation, Resettlement और आजीविका की गारंटी के किसी भी परिवार को विस्थापित नहीं किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, केंद्र और राज्य सरकार का कहना है कि Ken-Betwa River Linking Project बुंदेलखंड के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है। सरकार के अनुसार इससे सिंचाई क्षमता बढ़ेगी, पेयजल की उपलब्धता सुधरेगी और क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। सरकार का यह भी कहना है कि परियोजना के क्रियान्वयन में पर्यावरण और पुनर्वास से जुड़े सभी कानूनी प्रावधानों का पालन किया जा रहा है।
फिलहाल, Ken-Betwa River Linking Project को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और प्रशासन के बीच मतभेद बने हुए हैं। एक ओर सरकार इसे बुंदेलखंड के विकास की बड़ी परियोजना बता रही है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित आदिवासी समुदाय न्यायपूर्ण Compensation, Rehabilitation और Resettlement की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।

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